उनकी गलियों से जो हम रहे थे गुजर,
उनकी दीदार को आँखे हुई थी बेवस ,
इससे पहले की मेरी आंखें न जाये छलक ,
लोग मेरी मोहब्बत को न ले परख ,
ये बादल तू आ और जमके बरस ......
उनकी दीदार को आँखे हुई थी बेवस ,
इससे पहले की मेरी आंखें न जाये छलक ,
लोग मेरी मोहब्बत को न ले परख ,
ये बादल तू आ और जमके बरस ......
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